स्त्री-पुरुष संबंधों का संवेदनशील और आधुनिक विश्लेषण—मन्नू भंडारी की नजर से।
लेखिका: सविता उत्तम
मार्गदर्शक: डॉ. जशाभाई पटेल
हिंदी साहित्य की प्रमुख रचनाकार मन्नू भंडारी ने जिस गहराई और संवेदनशीलता के साथ स्त्री-पुरुष संबंधों को चित्रित किया है, वह आज के समय में भी उतना ही प्रासंगिक है। उनकी कहानियाँ और उपन्यास न केवल समाज में स्त्री की स्थिति को उजागर करते हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि समय के साथ स्त्री की सोच, इच्छाएँ, और संबंधों को देखने का तरीका कैसे बदलता गया। मन्नू भंडारी का साहित्य स्त्री स्वतंत्रता, आत्मसम्मान और आधुनिक संबंधों की जटिलताओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
स्त्री स्वतंत्रता की उभरती आवाज
मन्नू भंडारी की रचनाओं में स्त्री सिर्फ करुणा, त्याग और सहनशीलता की मूर्ति नहीं है—वह अपनी इच्छाओं, पहचान और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाली सशक्त व्यक्तित्व के रूप में सामने आती है।
‘आपका बंटी’ की शकुन इसका सबसे प्रभावशाली उदाहरण है। वह सामाजिक अपेक्षाओं और दकियानूसी सोच को चुनौती देती है और अपने लिए नई राह चुनती है। उसके निर्णयों में एक ऐसी स्त्री का आत्मविश्वास दिखाई देता है, जो अब केवल परंपराओं की छाया में जीने को तैयार नहीं।
आधुनिक संबंधों का बदलता स्वरूप
‘एक इंच मुस्कान’ और ‘यही सच है’ जैसे उपन्यास और कहानियाँ दिखाती हैं कि आधुनिक युग में संबंध पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल हो गए हैं।
- प्रेम में असुरक्षाएँ
- भावनात्मक दूरी
- व्यक्तिगत स्वतंत्रता की चाह
- और आत्मसंतोष की तलाश
इन सभी के बीच स्त्री और पुरुष दोनों नए प्रकार के मानसिक संघर्ष से गुजरते हैं। भंडारी ने इन संवेदनाओं को यथार्थवादी शैली में प्रस्तुत किया है, जिसमें संबंध टूटते भी हैं और बदलते भी।
पुरुष-प्रधान संस्कृति से टकराव
‘अकेली’ कहानी में सोमा बुआ का चरित्र इस बात का प्रतिनिधित्व करता है कि एक स्त्री अपने अकेलेपन, सामाजिक दबाव और पुरुष के स्वामित्ववादी व्यवहार में कैसे पिसती है। पुराने सामाजिक ढोचों की यह तस्वीर पाठकों को यह एहसास कराती है कि स्वतंत्र दिखने वाली आधुनिक दुनिया में भी कई स्त्रियाँ आज वही संघर्ष झेल रही हैं।
नई स्त्री का उदय
मन्नू भंडारी के साहित्य में “नई स्त्री” सिर्फ विद्रोह नहीं करती, बल्कि अपनी भावनाओं, अपने मन और अपने निर्णयों की मालकिन बनकर उभरती है।
वह समझती है कि—
- संबंध बराबरी के होने चाहिए
- प्रेम आपसी सम्मान पर टिकना चाहिए
- और आत्मनिर्भरता किसी भी संबंध की सबसे मजबूत नींव है
यह सोच आधुनिक स्त्री के भीतर जन्म ले रही नई स्वतंत्रता को दर्शाती है।
निष्कर्ष
मन्नू भंडारी का साहित्य स्त्री-पुरुष संबंधों को केवल सामाजिक ढांचे में नहीं देखता, बल्कि उन्हें मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक और व्यक्तिगत स्तर पर खोलकर प्रस्तुत करता है। उनकी रचनाएँ हमें यह सिखाती हैं कि जैसे-जैसे समाज आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे संबंधों का स्वरूप भी बदलता है—और इस बदलाव के केंद्र में स्त्री की स्वतंत्रता और उसकी पहचान की खोज महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
मन्नू भंडारी का साहित्य आज भी नई पीढ़ी को सोचने, समझने और समाज के प्रति संवेदनशील बनने की प्रेरणा देता है।